- गुमराह करने की कोशिश: बीमारी का मेडिकल पर्चा भेजकर वकील खुद दूसरी अदालत में पेश हो रहे थे।
- तथ्यों को छिपाना: आवेदकों को मिली अंतरिम राहत की जानकारी भी कोर्ट से छिपाई गई।
- कड़ी चेतावनी: हाईकोर्ट ने इसे पेशेवर आचरण के विरुद्ध मानते हुए आर्थिक दंड और भविष्य के लिए चेतावनी दी।
1. क्या था पूरा मामला?
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि संबंधित वकील ने एक प्रकरण में अपनी अनुपस्थिति का कारण 'बीमारी' बताया था और इसके समर्थन में मेडिकल पर्चा भी भेजा था। लेकिन हैरानी की बात तब सामने आई जब पता चला कि उसी दिन और उसी समय वह वकील एक दूसरी अदालत में पेश होकर जिरह कर रहे थे।
2. कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने वकील के इस दोहरे आचरण पर नाराजगी जताते हुए कहा:
"वकील का यह व्यवहार न्यायालय को जानबूझकर धोखा देने का प्रयास है। यह न केवल पेशेवर नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान है। इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।"
3. महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने का आरोप
जुर्माना लगाने का एक और बड़ा कारण यह भी था कि वकील ने अदालत को यह नहीं बताया कि उनके आवेदकों को पहले ही एक अन्य मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत (Interim Relief) मिल चुकी थी। अदालत ने इसे तथ्यों को छिपाने की गंभीर श्रेणी में रखा।
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