MP में FDR तकनीक से बनेंगी नई सड़कें: 50% तक कम लागत, पुरानी सड़कों का होगा रीसायक्लिंग | Madhya Pradesh Road News

Shailendra Tiwari
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ब्रेकिंग न्यूज:-  मध्यप्रदेश में अब नई तकनीक से बनेंगी सड़कें, नगर निगमों को FDR अपनाने के निर्देश; पुरानी सड़कों का होगा पूरा पुनर्निर्माण। हम इस ऑर्टिकल में आपको बताने जा रहे है कि मप्र. में इस समय परिवहन को लेकर बहुत बड़ी अपडेट आ रही है , संभाग में हुई बैठक ने लिया है अहम निर्णय आइए हम आपको पूरी जानकारी विस्तृत तौर पर बताते है।
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MP में सड़क निर्माण का बदलेगा तरीका, FDR तकनीक से सस्ती और मजबूत सड़कें तैयार होंगी
MP में सड़क निर्माण का बदलेगा तरीका, FDR तकनीक से सस्ती और मजबूत सड़कें तैयार होंगी
HIGHLIGHTS
  1. नई तकनीक लागू: नगर निगमों में FDR तकनीक से सड़क निर्माण अनिवार्य
  2. कम लागत, ज्यादा मजबूती: 40-50% तक खर्च में कमी संभव
  3. पुरानी सड़कों का पुनर्चक्रण: 100% मटेरियल का होगा दोबारा उपयोग
  4. सख्त निर्देश जारी: अधिकारियों को लक्ष्य तय कर काम करने के आदेश

📰 मध्यप्रदेश में सड़क निर्माण में बड़ा बदलाव: FDR तकनीक से बनेंगी नई सड़कें, जानिए क्या होगा फायदा


1. शहरी सड़कों के निर्माण का बदलेगा तरीका

Bhopal से जारी निर्देशों के अनुसार अब प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सड़क निर्माण और मरम्मत का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगर निगमों और संभाग स्तर पर फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (FDR) तकनीक को अनिवार्य रूप से लागू करने का फैसला लिया है।


2. अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त Sanket Bhondve ने सभी नगर निगम आयुक्तों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नई सड़कों का निर्माण अब FDR तकनीक से ही किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

3. पुरानी सड़कों का होगा स्मार्ट पुनर्निर्माण

नई नीति के तहत शहरों में उन सड़कों की पहचान की जाएगी जो समय के साथ ऊंची हो चुकी हैं और आसपास के मकान नीचे हो गए हैंइन सड़कों को हटाकर उनसे निकलने वाले डामर, कंक्रीट और मिट्टी का 100% पुनर्चक्रण किया जाएगा और उसी सामग्री से नई मजबूत सड़कें तैयार होंगी।

4. क्या है FDR तकनीक, कैसे काम करती है

FDR तकनीक में पुरानी सड़क को पूरी गहराई तक हटाकर उसी सामग्री में सीमेंट और विशेष रसायन मिलाए जाते हैं। इसके बाद इसे दोबारा बिछाकर कम्पेक्शन किया जाता है, जिससे सड़क पहले से अधिक मजबूत और टिकाऊ बनती है।

5. कम खर्च में बेहतर सड़कें

विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक से सड़क निर्माण की लागत में करीब 40 से 50 प्रतिशत तक कमी आती है। साथ ही यह पर्यावरण के अनुकूल भी है, क्योंकि इसमें पुरानी सामग्री का दोबारा उपयोग होता है और मलबा कम निकलता है।

6. शहरी विकास को मिलेगा नया आधार

सरकार का मानना है कि इस नई तकनीक से न सिर्फ सड़कें ज्यादा समय तक टिकेंगी, बल्कि रखरखाव का खर्च भी घटेगा और शहरों में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।

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