- रेलवे की तत्परता: ट्रेन में यात्री की तबीयत बिगड़ते ही अलर्ट हुआ कंट्रोल रूम, प्लेटफॉर्म पर तैनात मिले डॉक्टर।
- सिस्टम की नाकामी: घंटों इंतजार के बाद भी नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस, तड़पता रहा मरीज।
- बेबसी का सफर: जान बचाने के लिए मजबूरन मरीज को ऑटो रिक्शा में लादकर ले जाना पड़ा अस्पताल।
1. उधना-मालदा टाउन एक्सप्रेस में मची चीख-पुकार
2. 108 एंबुलेंस: उम्मीद जो टूट गई
डॉक्टरों ने मरीज की हालत देखते हुए उन्हें फौरन जिला अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। नियम के मुताबिक 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया, लेकिन मिनट घंटों में बदल गए और एंबुलेंस का कहीं अता-पता नहीं था। यह उस समय की बात है जब एक-एक सेकंड की कीमत मरीज के जीवन के बराबर थी।
परिजनों का दर्द:-
- "रेलवे के डॉक्टरों ने तो फरिश्ता बनकर मदद की, लेकिन सरकार की एंबुलेंस सेवा ने हमें बीच रास्ते में छोड़ दिया। क्या इसी भरोसे पर जनता अपनी जान सरकार के हाथ में सौंपती है?"
3. जब ऑटो बना 'एंबुलेंस'
यह भी पढ़ें- बालाघाट: मीटिंग में हंसना पड़ा भारी, SP ने ASI को किया सस्पेंड, पुलिस विभाग में अनुशासन पर बड़ा एक्शन
यह भी पढ़ें- MP Teacher News: डेढ़ लाख शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी, पात्रता परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
यह भी पढ़ें- कटनी साउथ-निवार रेल ब्लॉक: 18 अप्रैल से बंद रहेगा तखला रेलवे फाटक, देखें वैकल्पिक मार्ग और समय
© 2025-2026 Vande Prime | All Rights Reserved.
Disclaimer: कृपया इस समाचार को स्वयं भी सत्यापित करें। यह जानकारी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त की गई है। इसकी पूर्ण सटीकता का दावा वंदे प्राइम (Vande Prime) नहीं करता।





Thank You For Commets. The Vande Prime Team Member Replying you Shortly.
Have a Nice Day