- परिजनों का इंकार: बिहार से कटनी पहुंचे माता-पिताओं ने मानव तस्करी के आरोपों को सिरे से नकारा।
- बेहतर कल की तलाश: परिजनों का दावा— "शिक्षा के लिए महाराष्ट्र के मदरसों में भेज रहे थे बच्चे।"
- गर्मी और बेबसी: भीषण गर्मी के बीच थाने के चक्कर काटते मासूम और उनके परिजन हुए परेशान।
1. "मजबूरी को अपराध न समझें" - परिजनों की गुहार
मंगलवार को बिहार के अररिया और आसपास के जिलों से दर्जनों परिजन कटनी जीआरपी थाने पहुंचे। आंखों में आंसू और हाथों में आधार कार्ड लिए इन माता-पिताओं का कहना है कि वे आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं। उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी तालीम और रहने-खाने की सुविधा के लिए महाराष्ट्र के लातूर और नांदेड़ स्थित मदरसों में भेजा था।
"हमने अपने बच्चों को अंधेरे से निकालने के लिए शिक्षकों के साथ भेजा था, हमें नहीं पता था कि हमारे अरमानों को 'तस्करी' का नाम दे दिया जाएगा।" - एक व्यथित अभिभावक
2. जीआरपी की जांच और दस्तावेजों का जाल
जीआरपी डीएसपी विजय गरौठिया ने बताया कि कानून अपनी प्रक्रिया का पालन कर रहा है। फिलहाल मामला इन बिंदुओं पर टिका है:
- बयानों का मिलान: पहुंचे हुए माता-पिताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
- सत्यापन (Verification): परिजनों द्वारा दिखाए जा रहे दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है कि क्या वे वास्तव में बच्चों के माता-पिता हैं।
- शिक्षकों की भूमिका: बच्चों के साथ जा रहे शिक्षकों से भी पूछताछ जारी है।
3. भीषण गर्मी और सिस्टम की उलझन
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