- बड़ा फैसला: जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा अपना त्यागपत्र।
- महाभियोग का साया: लोकसभा के 140 सदस्यों ने जस्टिस वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर किए थे हस्ताक्षर।
- विवाद की वजह: सरकारी आवास में आग लगने के बाद मिला था 1.5 फीट ऊंचा जली हुई नकदी का ढेर
1. "गहरी पीड़ा" और इस्तीफे का दर्द
9 अप्रैल 2026 को भेजे गए अपने 13 पन्नों के पत्र में 57 वर्षीय जस्टिस वर्मा ने लिखा कि वे "गहरी पीड़ा" के साथ पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने न्यायिक सेवा को एक बड़ा सम्मान बताया, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए पद पर बने रहना उचित नहीं समझा। गौर करने वाली बात यह है कि उनके खिलाफ महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया ने काफी रफ्तार पकड़ ली थी।

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जस्टिस वर्मा
2. वह घटना जिसने करियर पर दाग लगा दिया
विवाद की कहानी 14 मार्च 2025 की उस सर्द सुबह से शुरू होती है, जब दिल्ली में उनके सरकारी घर के स्टोर रूम में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुँचे दमकलकर्मियों और अधिकारियों के होश तब उड़ गए जब उन्हें वहां 1.5 फीट ऊंचा नोटों का ढेर मिला, जिसमें से कई नोट जल चुके थे।

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जस्टिस वर्मा के परिवार ने तब सफाई दी थी कि उस स्टोर रूम तक घरेलू स्टाफ की पहुंच थी और उन्होंने वहां कोई नकदी नहीं रखी थी। लेकिन यह सफाई जांच एजेंसियों के गले नहीं उतरी।
9 अप्रैल 2026 को भेजे गए अपने 13 पन्नों के पत्र में 57 वर्षीय जस्टिस वर्मा ने लिखा कि वे "गहरी पीड़ा" के साथ पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने न्यायिक सेवा को एक बड़ा सम्मान बताया, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए पद पर बने रहना उचित नहीं समझा। गौर करने वाली बात यह है कि उनके खिलाफ महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया ने काफी रफ्तार पकड़ ली थी।
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2. वह घटना जिसने करियर पर दाग लगा दिया
विवाद की कहानी 14 मार्च 2025 की उस सर्द सुबह से शुरू होती है, जब दिल्ली में उनके सरकारी घर के स्टोर रूम में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुँचे दमकलकर्मियों और अधिकारियों के होश तब उड़ गए जब उन्हें वहां 1.5 फीट ऊंचा नोटों का ढेर मिला, जिसमें से कई नोट जल चुके थे।
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जस्टिस वर्मा के परिवार ने तब सफाई दी थी कि उस स्टोर रूम तक घरेलू स्टाफ की पहुंच थी और उन्होंने वहां कोई नकदी नहीं रखी थी। लेकिन यह सफाई जांच एजेंसियों के गले नहीं उतरी।
3. इस्तीफे के बाद बढ़ सकती है 'जांच की तपिश'
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस्तीफा देना जस्टिस वर्मा के लिए 'सुरक्षित रास्ता' नहीं बल्कि 'मुश्किलों का नया मोड़' साबित हो सकता है:
- CBI और FIR: पद छोड़ते ही उन्हें मिलने वाली कानूनी सुरक्षा खत्म हो जाएगी, जिससे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हो सकता है।
- ED की एंट्री: इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के कारण प्रवर्तन निदेशालय (ED) 'हवाला' और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर सकता है।
- पेंशन पर संकट: अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो उनके सेवानिवृत्ति लाभों और पेंशन पर भी गाज गिर सकती है।
4. "जांच पक्षपाती थी" – जस्टिस वर्मा का पलटवार
अपने बचाव में जस्टिस वर्मा ने जांच समिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रक्रिया को 'अनुचित' और 'पूर्वाग्रह से ग्रसित' करार देते हुए कहा कि समिति ने उनके पक्ष वाले साक्ष्यों और फायर रिपोर्ट को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी ठोस आधार के खुद को निर्दोष साबित करने के लिए मजबूर किया गया।
निष्कर्ष:: एक न्यायाधीश का इस्तीफा और उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप न्यायपालिका की शुचिता पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। अब देखना यह है कि कानून की देवी की आंखों पर बंधी पट्टी इस मामले में कैसा इंसाफ करती है।
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